एक बेबफा की कहानी
दोस्तों पेश हे - एक बेबफा की कहानी ...............
जो कभी हमारी थी अब आज वो परायी होगी ,
इधर गुम सुम है हम उधर उन्होंने हाथो पर मेहंदी रचायी होगी .......
ये सोच कर दिल दहल जाता है ,
कल गेर की बांहों मै मेरी कयामात होगी ....
आँखों मै अश्क है मेरे
दिलो मै गमो का समन्दर ठहरा है ..........
जिन्होंने कभी राते गुजारी थी हमारे साथ
आज उन्ही की गोद मै किसी और का सहरा है .............
मिलना क्या खाक होगा उनसे .,
वो तो मिलने से भी कतरा रहे है ...........
जिनकी रातो का मालिकाना हक़ हम जताया करते थे .
आज वो किसी और पर अपना हुश्न लुटा रहे है .................
उनके हुश्न के तो सभी दीवाने थे .
पर जुल्फों का नशा हम पर छाया था ....
उस बेबफा ने हमें भी कभी अपने होटो से लगाया था ....
शाम ऐ हालत देख कर आँखों से अश्क चले आये थे ...
जब उसी बेबफा को अपने दोस्त की बाहो में पाया था ......
very very nice
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